ये भूमंडल बड़ा विचित्र है , यहाँ एक से बढ़ के एक और अनूठे जीव पाये जाते है | और उन सब जीवों में जो जीव अपने आप को सबसे ज्यादा बुद्धिमान और खरखाह समझता है तो वो है मनुष्य | निसंदेह आप इस बात से इनकार नही कर सकते भले ही आप इसे स्वीकार करे या ना करे | और वैसे हमने स्वीकार करना सीखा ही कब ? जी हाँ, हम तो सदा दूसरो को सीखाने में ही ब्यस्त रहे हैं ॥ तुम ऐसा करो, वैसे करो, ये करो, वो करो, हम जब छोटे थे तो ऐसा किया करते थे , वैसा किया करते थे और ना जाने क्या क्या ?? तरह तरह की बात बना कर और भांज कर अपने आप को ही हम सर्वोपरी दिखाना चाहते हैं। कभी अपने गीरेबान में झाकने का अपने को समय ही कहाँ मिला ? जी हां , हमने सदा दूसरो का मूल्यांकन करने में ही अपनी भलाई समझी । पर अगर बातस्व की आई तो हमने अपने अपने कदम पीछे ले ली | हम तो ये कह कर निकल गए कि " अरे हम तो ऐसे हैं भइया ये हमारा अलग ही स्टाइल है "। और यदि सचमुच हमने स्व का मूल्यांकन करना प्रारम्भ कर दिया होत्ता तब शायद हम मनुष्य नही कहलाते . वैसे भी हमारे पास गुणों के ऐसे भंडार पड़े हैं जो हमें दूसरो जीवों से अलग करते हैं उदाहरंस्वरूप - अपना स्वार्थ, अपना फ़ायदा, अपनी तरक्की, दूसरो से इर्ष्या , द्वेष , छल, कपट और ना जाने क्याक्या ... फ़िर हमें स्वमूल्यांकन , कर्तव्यपरायणता , परोपकारिता कि क्या दरकार ।।
Sunday, September 6, 2009
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विडम्बना तो ये है कि हमें एक simple c prog भी लिखना नही आता.. Software क्या ख़ाक डिजाईन करूँगा ?
ReplyDelete--------------
अरे नहीं मित्र, नेगेटिविज्म हटाओ मन से। अब देखो मैं हूं इलेक्ट्रिकल इलेक्ट्रॉनिक्स इन्जीनियर पढ़ाई से और प्रबन्धन कर रहा हूं माल गाड़ी का।
इतना बढ़िया ब्लॉग बनाया है तो आप विलक्षण हैं ही!
अब आपकी गाडी पटरी पे आ गयी है. ब्लॉग जगत में जो कदम रखा है. ये आपको सॉफ्टवेर इंजिनियर जरूर बना देगी. अगर न बना सकी तो सोशल इंजिनियर जरूर बनोगे. ऐसे ही लिखते रहो. मेरा करियर तो हिंदी कविता ब्लॉग ( यादों का इंद्रजाल ) ने ही संवारा है. वैसे कभी भी सॉफ्टवेर बिज़नस करने की इच्छा हो तो हमें याद कर लीजयेगा. बहरहाल लिखना जारी रखे... धन्यवाद.
ReplyDeletemujhe bhi start karna hai software buisness
Deleteमित्र मेरी सलाह है कि नकारात्मकता कभी भी स्वमूल्यांकन की विधि नहीं है। आपने पढ़ाई की है इंजीनियर है पर ये वो सच है जिनसे आपको समाज को बताना है कि आप पढ़े लिखे है। आप अपने लिये कुछ करें। कुछ पढ़े कुछ लिख तो आप रहे ही है लेकिन नकारात्मकता को पैमाना मत बनाइये। स्वमूल्यांकन का
ReplyDeleteबस बधाई स्वीकारे……………चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......
ReplyDeleteगुलमोहर का फूल
जितनी सच्चाई से आपने अपने मन की बात बया की है……………………वह काबिले तारीफ़ है । और आप ऐसा क्यों कहते है कि "अब जिंदगी में कुछ आगे होने वाला तो है नहीं.. तब सोचने और ख्याली पुलाव पकाने में हर्ज़ ही क्या है" । परिस्थितीया कैसी भी आये be +ve............क्या समझे आप ? :)। सम्पर्क में रहे ।
ReplyDeleteगुलमोहर का फूल
यहां जिन लोगों ने आपकी तारीफ की है, वे गधे हैं। आपकी प्रशंसा नहीं की जा सकती। आप बहुत ही नकारात्मक सोच रखते हैं। आप या तो मेहनत नहीं करना चाहते या बहुत ही आरामतलब किस्म के इंसान हैं। आपने जिस चीज की पढ़ाई की है, क्यों नहीं उसी विषय पर ब्लॉग बनाते और आसान शब्दों में हम लोगों को भी बताते। जिन लोगों ने आपको यहां समझाया है, वे सचमुच आपके शुभचिंतक हैं।
ReplyDeleteकृपया इस तरह के विचार न पालें। कुछ सार्थक करें। आपने जो कुछ प्रोफाइल में लिखा है, उसे हटा दें और कुछ नया लिखें। जीवन में जोश का संचार होश के साथ करें।
कुछ और ब्लॉगों का अध्ययन करेंगे तो आपको तमाम बातों का जवाब मिलेगा। किसी चीज की आलोचना करना नकारात्मक सोच नहीं है लेकिन जीवन को नकारात्मक ढंग से लेना वाकई नकारात्मक मानसिकता का ही नतीजा होता है।
मेरे ब्लॉग पर आने का आमंत्रण है।
man ke hare haar hai,man ke jeete jeet.narayan narayan
ReplyDeleteचिट्ठाजगत में आपका स्वागत है
ReplyDelete"तुम हारो चाहे जीतो, हिम्मत मगर मत छोड़ना
ReplyDeleteखुलते हैं दरवाज़े भी यारों, खटखटा देने के बाद ||"
निराश मत हो जनाब, संघर्ष कीजिये ... सफलता जरूर मिलेगी |
ब्लोगिस्तान में स्वागत है | शुभकामनाएं ||
छिप - छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालों
ReplyDeleteकुछ सपनो के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता ||
भाईसाब, निराशा में से आशा की किरण खोजिये और फिर चल पड़िये उसके पीछे | और फिर देखिये कमाल ...
शुभकामनाओं सहित -
हिमांशु डबराल
www.bebakbol.blogspot.com
welcome, assessment should be to go up,it is not bad
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